शादी के बाद 'लाइसेंस' वाली सोच और पुरुष का कोमल हृदय
शादी के बाद 'लाइसेंस' वाली सोच और पुरुष का कोमल हृदय
शादी के बाद 'लाइसेंस' वाली सोच और पुरुष का कोमल हृदय: क्या वाकई बदल रहे हैं रिश्तों के मायने? Relationship: शादी का लड्डू जो खाए वो पछताए और जो न खाए वो भी पछताए, यह कहावत तो आपने सुनी होगी। लेकिन आजकल रिश्तों के बाजार में कुछ नई ही थ्योरी चल रही है। समाज में एक तबका ऐसा भी है जो शादी को महज एक 'लीगल एग्रीमेंट' या यूं कहें कि 'आजादी का सर्टिफिकेट' मानने लगा है। वहीं दूसरी ओर, पुरुषों की भावनाओं को लेकर एक ऐसा सच है जो अक्सर मर्दानगी की परतों के नीचे दबा रह जाता है। आज हम बात करेंगे उन कड़वे सच और मीठी भावनाओं की, जो वैवाहिक जीवन की नींव को हिला रही हैं या उसे मजबूती दे रही हैं। Overview: क्या शादी वाकई बेवफाई का लाइसेंस है? क्या एक शक्तिशाली पुरुष भी प्रेम में पड़कर बच्चा बन जाता है? इस लेख में हम रिश्तों के उन अनकहे पहलुओं को खंगालेंगे जो अक्सर ड्राइंग रूम की चर्चाओं से गायब रहते हैं। हम देखेंगे कि कैसे 'कन्यादान' की आड़ में कुछ लोग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं और क्यों पुरुष अपनी 'थाली' में किसी और की हिस्सेदारी बर्दाश्त नहीं कर पा…
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नमस्ते! मैं आरोही शर्मा हूँ, हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों से जुड़ी हुई एक युवा रिपोर्टर। मैंने अपनी पढ़ाई 12वीं तक पूरी की है और हमेशा से समाज में हो रही गतिविधियों को समझने और लोगों तक सही जानकारी पहुँचाने में रुचि रही है। मेरा मानना है कि जान…