पुलिस रिमांड और न्यायिक हिरासत में क्या अंतर है? जानें जेल और लॉकअप के सबसे बड़े कानूनी नियम

BNSS के तहत पुलिस रिमांड (Police Remand) और न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में मुख्य अंतर, समय सीमा और कैदियों के अधिकार।
पुलिस रिमांड और न्यायिक हिरासत में क्या अंतर है? जानें जेल और लॉकअप के सबसे बड़े कानूनी नियम
Criminal Procedure: जब पुलिस किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में गिरफ्तार करती है, तो कोर्ट के सामने दो ही रास्ते होते हैं—या तो आरोपी को पुलिस लॉकअप में भेजा जाए या फिर सरकारी जेल में। टीवी, अखबारों और फिल्मों में हम हमेशा 'पुलिस रिमांड' (Police Remand) और 'न्यायिक हिरासत' (Judicial Custody) जैसे शब्द सुनते हैं। आम लोग अक्सर इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन कानूनी रूप से इन दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। 1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)—के तहत इन हिरासतों की समय सीमा और पुलिस की शक्तियों से जुड़े नियमों को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। यह ब्लॉग आपको आसान भाषा में समझाएगा कि रिमांड और जेल में क्या अंतर होता है और इस दौरान आरोपी को क्या कानूनी अधिकार मिलते हैं। पुलिस रिमांड और न्यायिक हिरासत क्या हैं? (बुनियादी परिभाषा) भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था का एक बुनियादी नियम है कि जब भी पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, तो उसे 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है। इसके बाद मजिस्ट्रेट यह…

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नमस्कार दोस्तों! मैं देश राज हूँ, देवभूमि हिमाचल प्रदेश (शिमला) का निवासी। आर्ट्स में मेरी ग्रेजुएशन (BA) और समाज को गहराई से देखने के मेरे नज़रिये ने मुझे एक आम नागरिक (Common Citizen) के अधिकारों और ज़रूरतों को समझने की प्रेरणा दी। इसी सोच के साथ …

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