Gadgets/Finance Market: भारत में आजकल हर दूसरे शख्स के हाथ में आईफोन या वनप्लस जैसे प्रीमियम स्मार्टफोन और घर में तगड़े फीचर्स वाला महंगा लैपटॉप दिखना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गैजेट्स की आसमान छूती कीमतों के बावजूद लोग इन्हें इतनी आसानी से कैसे खरीद रहे हैं? इसके पीछे कोई मोटी सैलरी या लॉटरी नहीं, बल्कि देश में तेजी से बढ़ रहा EMI का क्रेज है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे किश्तों के इस खेल ने पूरे भारतीय बाजार को बदल दिया है और क्यों अब दुकानदार कंपनियों से पूरे 3 साल यानी 36 महीने की नो-कॉस्ट EMI स्कीम शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
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गैजेट्स की कीमतें हुईं आसमान छूने वाली, फिर भी क्यों मची है लूट?
वैश्विक स्तर पर टेक इंडस्ट्री में बड़े बदलाव आए हैं। स्क्रीन मेमोरी, प्रोसेसर और दूसरे जरूरी कंपोनेंट्स की भारी कमी के कारण अब स्मार्टफोन और लैपटॉप बनाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। इसके अलावा, भारतीय ग्राहकों की सोच में भी एक बड़ा बदलाव आया है। अब लोग बार-बार सस्ते और साधारण फोन बदलने के बजाय एक ही बार में महंगा, टिकाऊ और धांसू फीचर्स वाला प्रीमियम फोन लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
इन दोनों वजहों से मार्केट में गैजेट्स की औसत कीमत बहुत तेजी से ऊपर गई है। आज के समय में कई प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमत 1 लाख रुपये के आंकड़े को भी पार कर चुकी है। मध्यवर्गीय परिवार के किसी भी व्यक्ति के लिए एक बार में इतनी बड़ी रकम कैश या वन-टाइम पेमेंट के रूप में देना लगभग नामुमकिन होता है। यहीं से एंट्री होती है आसान किश्तों यानी फाइनेंस की, जिसने महंगे शौक को आम जनता की पहुंच में ला दिया है।
भारतीय ग्राहकों के सिर चढ़कर बोल रहा है EMI का जादू
कीमतें बढ़ने के कारण अब भारतीय ग्राहक जेब से पूरा पैसा निकालने के बजाय फाइनेंस और EMI ऑफर्स पर पूरी तरह निर्भर हो गए हैं। हालिया रिपोर्ट्स के आंकड़े बताते हैं कि कुछ साल पहले तक देश में सिर्फ 20% लोग ही EMI पर फोन खरीदना चुनते थे, लेकिन आज यह आंकड़ा दोगुने से ज्यादा बढ़कर 45% तक जा पहुंचा है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च की एक स्टडी के मुताबिक, इस समय भारतीय बाजार में बिकने वाले करीब 44% स्मार्टफोन किसी न किसी फाइनेंस ऑफर, क्रेडिट कार्ड डिस्काउंट या मंथली EMI स्कीम के जरिए ही बेचे जा रहे हैं। लोग अब दुकान पर जाकर फोन की कुल कीमत पूछने के बजाय सीधे यह पूछते हैं कि 'भाई, इसकी महीने की किश्त कितनी बनेगी?'
लैपटॉप मार्केट में भी आया बड़ा तूफान: आसुस इंडिया का बड़ा खुलासा
यह ट्रेंड सिर्फ मोबाइल फोन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कंप्यूटर और लैपटॉप की बिक्री में भी हूबहू यही बदलाव देखने को मिल रहा है। दिग्गज टेक कंपनी आसुस (ASUS) इंडिया ने अपने सेल्स डेटा के आधार पर बताया कि उनके लैपटॉप की कुल बिक्री में EMI का हिस्सा 20% से बढ़कर अब सीधे 40% के पार पहुंच गया है।
कंपनी का कहना है कि आज का ग्राहक कुल बजट देखने के बजाय अपनी मंथली पॉकेट मनी या बजट को देखता है। उदाहरण के लिए, जो ग्राहक पहले दुकान पर 40,000 रुपये नकद लेकर आते थे और एक एवरेज लैपटॉप खरीदते थे, वे अब उसी बजट को डाउन पेमेंट बनाकर EMI की मदद से 80,000 रुपये का एक बेहतरीन प्रीमियम लैपटॉप घर ले जा रहे हैं। इससे ग्राहकों को बेहतर तकनीक मिल रही है और कंपनियों की बिक्री बढ़ रही है।
आखिर दुकानदार क्यों अड़े हैं 36 महीने की EMI की मांग पर?
इस समय भारतीय बाजार में ज्यादातर रिटेल स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर 18 महीने या अधिकतम 24 महीने की ही नो-कॉस्ट EMI स्कीम मिलती है। लेकिन अब जब फोन और लैपटॉप की कीमतें 1 लाख से ऊपर जा रही हैं, तो 24 महीने की किश्त भी आम नौकरीपेशा लोगों के लिए थोड़ी भारी पड़ने लगती है। इसी वजह से देश के छोटे-बड़े रिटेलर्स और व्यापारिक संगठन कंपनियों से 36 महीने यानी पूरे 3 साल की नो-कॉस्ट EMI लाने की जिद कर रहे हैं।
दुकानदारों और एक्सपर्ट्स का गणित बहुत सीधा है। उनका मानना है कि अगर किश्त चुकाने की समय सीमा को 24 महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दिया जाता है, तो ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाला हर महीने का बोझ करीब 1,500 से 2,000 रुपये तक कम हो जाएगा। जब मंथली किश्त कम होगी, तो जो मिडिल क्लास व्यक्ति आज 60,000 का फोन लेने की सोच रहा है, वह भी बिना झिझक 1 लाख से ऊपर वाला प्रीमियम फोन खरीदने की हिम्मत कर सकेगा।
रियल-लाइफ उदाहरण: सुमित ने कैसे प्लान किया अपना नया गैजेट?
इस पूरे किश्त के गणित को हम लखनऊ के एक प्राइवेट एम्प्लोयी सुमित के उदाहरण से समझते हैं। सुमित की सैलरी 35,000 रुपये महीना है। उन्हें अपने ऑफिस के काम और फ्रीलांसिंग के लिए 90,000 रुपये का एक प्रीमियम लैपटॉप खरीदना था। सुमित के पास एक बार में देने के लिए 90,000 रुपये नगद नहीं थे।
अगर सुमित इसे मौजूदा 18 महीने की नो-कॉस्ट EMI पर खरीदते, तो उन्हें हर महीने करीब 5,000 रुपये की भारी किश्त देनी पड़ती, जिससे उनका मासिक बजट बिगड़ जाता। लेकिन अगर बाजार में दुकानदारों की मांग के अनुसार 36 महीने की नो-कॉस्ट EMI का विकल्प आ जाए, तो सुमित को हर महीने केवल 2,500 रुपये देने होंगे। 2,500 रुपये प्रति माह की यह रकम उनकी सैलरी के हिसाब से बेहद आसान है और वह बिना किसी तनाव के अपने सपनों का प्रीमियम लैपटॉप इस्तेमाल कर सकेंगे।
मौजूदा EMI सिस्टम बनाम मांग में चल रही 36 महीने की EMI
रिटेलर्स की इस नई मांग से आम ग्राहकों के बजट पर कितना बड़ा असर पड़ेगा, आइए इसे नीचे दी गई टेबल के माध्यम से ₹1,08,000 की कीमत वाले एक प्रीमियम स्मार्टफोन के उदाहरण से समझते हैं:
| EMI प्लान की अवधि | फोन की कुल कीमत (₹) | हर महीने आने वाली किश्त (₹) | ग्राहक की जेब पर मासिक दबाव |
|---|---|---|---|
| 18 महीने का प्लान (मौजूदा) | ₹1,08,000 | ₹6,000 प्रति माह | बहुत ज्यादा (मिडिल क्लास के बजट से बाहर) |
| 24 महीने का प्लान (मौजूदा) | ₹1,08,000 | ₹4,500 प्रति माह | मध्यम (थोड़ी खींचतान करनी पड़ेगी) |
| 36 महीने का प्लान (मांग) | ₹1,08,000 | ₹3,000 प्रति माह | बेहद कम और आसान (पॉकेट फ्रेंडली) |
क्या स्मार्टफोन और लैपटॉप कंपनियां मानेंगी दुकानदारों की यह बात?
इस पूरे मामले का एक दूसरा पहलू यह भी है कि 36 महीने की नो-कॉस्ट EMI स्कीम को लागू करना कंपनियों के लिए इतना आसान नहीं है। नो-कॉस्ट EMI में असल में ब्याज माफ नहीं होता, बल्कि ग्राहक के हिस्से का ब्याज स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी खुद बैंकों या फाइनेंस पार्टनर्स (जैसे बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी आदि) को अपनी जेब से चुकाती है।
अगर किश्त की अवधि 24 महीने से बढ़ाकर 36 महीने की जाएगी, तो कंपनियों को बैंकों को 3 साल का लंबा ब्याज देना होगा, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, व्यापारिक संगठनों का दावा है कि भले ही कंपनियों को प्रति फोन थोड़ा ज्यादा ब्याज देना पड़े, लेकिन इससे उनकी बिक्री में इतनी जबरदस्त उछाल आएगी कि उनका ओवरऑल मुनाफा रिकॉर्ड तोड़ देगा। भारत का पूरा गैजेट मार्केट अब तेजी से प्रीमियम सेगमेंट की तरफ शिफ्ट हो रहा है, ऐसे में कंपनियां इस मांग को ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज नहीं कर पाएंगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
किश्तों पर दुनिया घूमने और गैजेट्स खरीदने का यह नया ट्रेंड भारतीय बाजार को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। अगर कंपनियां आने वाले दिनों में 36 महीने यानी 3 साल की नो-कॉस्ट EMI स्कीम को मंजूरी दे देती हैं, तो यह देश के मध्यम वर्ग के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं होगा। हालांकि, ग्राहकों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि उतनी ही EMI का बोझ उठाएं जितना वे आसानी से हर महीने चुका सकें। क्या आप भी अपना अगला स्मार्टफोन या लैपटॉप EMI पर खरीदने की सोच रहे हैं? क्या आपके हिसाब से 36 महीने का यह प्लान आना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस पोस्ट को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो नया फोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. नो-कॉस्ट EMI (No-Cost EMI) असल में कैसे काम करती है, क्या इसमें सच में ब्याज नहीं लगता?
Ans 1. नो-कॉस्ट EMI में बैंक अपने नियम के अनुसार ब्याज जरूर लेता है, लेकिन स्मार्टफोन कंपनियां उस ब्याज की कुल रकम के बराबर का डिस्काउंट आपको फोन खरीदते समय ही दे देती हैं। इससे ग्राहक के लिए फोन की कुल कीमत एमआरपी से ज्यादा नहीं बढ़ती और उसे बिना ब्याज के किश्त का फायदा मिल जाता है।
Q2. 36 महीने की नो-कॉस्ट EMI आने से आम मिडिल क्लास ग्राहकों को क्या सबसे बड़ा फायदा होगा?
Ans 2. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हर महीने बैंक खाते से कटने वाली किश्त की राशि (Monthly EMI Amount) बहुत कम हो जाएगी। उदाहरण के लिए, जो किश्त पहले ₹4,500 महीने की आती थी, वह 3 साल का प्लान होने पर घटकर करीब ₹3,000 रह जाएगी, जिससे बजट पर प्रेशर नहीं पड़ेगा।
Q3. क्या 3 साल (36 महीने) तक एक ही फोन को किश्त पर चलाना तकनीकी रूप से सही फैसला है?
Ans 3. आजकल प्रीमियम स्मार्टफोन और लैपटॉप के कंपोनेंट्स बहुत मजबूत होते हैं और कंपनियां 4 से 5 साल तक का सॉफ्टवेयर अपडेट देती हैं। इसलिए अगर आप कोई 1 लाख रुपये का प्रीमियम फोन ले रहे हैं, तो उसे 3 साल तक किश्त चुकाते हुए इस्तेमाल करना एक वैल्यू-फॉर-मनी डील साबित हो सकता है।
Q4. क्या 36 महीने की इस लंबी EMI स्कीम के लिए कोई एक्स्ट्रा हिडन चार्ज भी देना पड़ सकता है?
Ans 4. आम तौर पर बैंक या फाइनेंस कंपनियां नो-कॉस्ट EMI शुरू करते समय एक छोटी सी वन-टाइम प्रोसेसिंग फीस (जो अक्सर ₹199 से ₹299 के बीच होती है) और उस फीस पर थोड़ा सा जीएसटी चार्ज करती हैं। इसके अलावा समय पर किश्त चुकाने पर कोई अतिरिक्त हिडन चार्ज नहीं लगता है।
Q5. इस समय भारत में कौन सी कंपनियां 36 महीने के EMI प्लान पर विचार कर रही हैं?
Ans 5. भारत के बड़े ऑफलाइन रिटेलर्स एसोसिएशन और आसुस, सैमसंग व अन्य बड़े प्रीमियम ब्रांड्स के डीलर इस स्कीम को लाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले त्योहारी सीजन या नए फ्लैगशिप लॉन्च के समय कुछ चुनिंदा ब्रांड्स इस 3 साल की आसान EMI की शुरुआत कर सकते हैं।