Personal Finance/India: पेट्रोल, राशन से लेकर बच्चों की स्कूल फीस तक सब कुछ महंगा हो गया है। दूसरी तरफ सैलरी कई सालों से वहीं की वहीं अटकी है। ऐसे में एक आम आदमी के मन में यही सवाल आता है कि अब हमें अपनी पहचान साबित करने वाले 'आधार कार्ड' से ज्यादा, महीने का खर्च चलाने वाले 'उधार कार्ड' (क्रेडिट कार्ड) की जरूरत है। इस लेख में हम इसी कड़वी सच्चाई पर बात करेंगे। हम गहराई से समझेंगे कि कैसे महंगाई हमारी जेब खाली कर रही है, हम कैसे कर्ज के जाल में फंस रहे हैं, और इस मुश्किल स्थिति से बाहर निकलने के क्या उपाय हैं।
| middle class man stressed over bills inflation |
बढ़ती महंगाई और घटती कमाई का असली सच
आजकल सोशल मीडिया पर एक लाइन बहुत वायरल हो रही है- "बढ़ती हुई महंगाई और घटती हुई कमाई को देखकर, आधार कार्ड की नहीं उधार कार्ड की जरूरत महसूस हो रही है।" यह सिर्फ एक चुटकुला नहीं है। यह हमारे देश के करोड़ों मध्यम वर्गीय परिवारों की रोजमर्रा की सच्चाई है।
बाजार में हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं। सब्जियों के भाव हफ्ते दर हफ्ते बदल जाते हैं। दूध और कुकिंग ऑयल के रेट आपकी जेब पर सीधा असर डालते हैं। लेकिन जब बात हमारी इनकम या सैलरी बढ़ने की आती है, तो इंक्रीमेंट के नाम पर हमें सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है।
जब आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया हो जाता है, तो इंसान के पास उधार मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। पहले लोग रिश्तेदारों से उधार मांगते थे। अब वह काम बैंकों के क्रेडिट कार्ड और लोन ऐप्स ने ले लिया है। इसी को हम 'उधार कार्ड' की संस्कृति कहते हैं।
आम आदमी की कहानी: एक रियल-लाइफ केस स्टडी
इस बात को बेहतर ढंग से समझने के लिए हम दिल्ली में रहने वाले सुमित का उदाहरण लेते हैं। सुमित एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। उसकी महीने की सैलरी 40,000 रुपये है। सुनने में यह रकम ठीक लगती है, लेकिन चलिए सुमित के खर्चों पर नजर डालते हैं।
महीने की पहली तारीख को सुमित की सैलरी आती है। इसमें से 15,000 रुपये घर के किराए में चले जाते हैं। 8,000 रुपये राशन और सब्जियों में खर्च हो जाते हैं। बच्चों की स्कूल फीस और ट्यूशन में 7,000 रुपये निकल जाते हैं। बिजली का बिल, पानी, मोबाइल रिचार्ज और पेट्रोल मिलाकर 6,000 रुपये और खर्च हो जाते हैं।
अब सुमित के पास बचे सिर्फ 4,000 रुपये। महीने के 20 दिन ही बीते हैं। अचानक घर में कोई बीमार पड़ जाता है या कोई मेहमान आ जाता है। अब सुमित क्या करेगा? यहीं एंट्री होती है क्रेडिट कार्ड यानी 'उधार कार्ड' की। सुमित अपनी जरूरत पूरी करने के लिए कार्ड स्वाइप करता है। अगले महीने वह क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के लिए अपनी नई सैलरी का हिस्सा देता है। इस तरह वह एक कभी ना खत्म होने वाले कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंस जाता है।
क्यों बढ़ रही है हर महीने उधार लेने की मजबूरी?
हम केवल अपनी आदतों की वजह से उधार नहीं ले रहे हैं। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं जो हमें ऐसा करने पर मजबूर कर रहे हैं:
- सैलरी का ना बढ़ना: महंगाई जिस दर से बढ़ रही है, उस हिसाब से कंपनियों में सैलरी नहीं बढ़ रही है। इससे लोगों की 'परचेजिंग पावर' यानी खरीदने की क्षमता कम हो गई है।
- लाइफस्टाइल का दबाव: समाज में दिखावे का चलन बढ़ गया है। नया फोन, ब्रांडेड कपड़े और बाहर खाना अब जरूरत सा बन गया है।
- आसानी से मिलने वाला कर्ज: आज से दस साल पहले लोन लेना बहुत मुश्किल था। आज आपके फोन पर एक क्लिक करते ही पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड मिल जाता है।
- मेडिकल इमरजेंसी: दवाइयों और अस्पतालों का खर्च इतना ज्यादा है कि बिना मेडिकल इंश्योरेंस या उधार के इलाज कराना आम आदमी के बस की बात नहीं रही।
5 साल पहले बनाम आज के खर्चों की तुलना
महंगाई के असर को समझने के लिए आइए हम कुछ जरूरी चीजों के दामों की तुलना करते हैं। इससे आपको अंदाजा होगा कि आपकी कमाई असल में क्यों कम लगने लगी है।
| जरूरी सामान/सेवा | साल 2019 में अनुमानित कीमत | आज के समय में अनुमानित कीमत |
|---|---|---|
| पेट्रोल (प्रति लीटर) | ₹70 - ₹75 | ₹95 - ₹105 |
| रसोई गैस (LPG सिलेंडर) | ₹700 के आसपास | ₹900 - ₹1000 के आसपास |
| खाने का तेल (प्रति लीटर) | ₹90 - ₹110 | ₹140 - ₹180 |
| दूध (प्रति लीटर फुल क्रीम) | ₹52 - ₹54 | ₹66 - ₹68 |
ऊपर दी गई टेबल से साफ पता चलता है कि हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम कितने बढ़ गए हैं। जब हर बुनियादी चीज महंगी हो जाएगी, तो आम इंसान को मजबूरन उधार का सहारा लेना ही पड़ेगा।
उधार कार्ड (Credit Card) के फायदे और भारी नुकसान
हम यह नहीं कह रहे कि क्रेडिट कार्ड पूरी तरह से बुरी चीज है। वित्तीय दुनिया में हर चीज के दो पहलू होते हैं। अगर आप इसका सही इस्तेमाल जानते हैं, तो यह एक हथियार है। वरना यह आपके गले की फांस बन सकता है।
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने के कुछ फायदे:
- मुसीबत में साथी: अगर आधी रात को अस्पताल जाना पड़े और बैंक खाते में पैसे न हों, तो क्रेडिट कार्ड बहुत काम आता है।
- रिवॉर्ड और कैशबैक: सही कार्ड से राशन या पेट्रोल भरवाने पर आपको कुछ प्रतिशत पैसे वापस मिल जाते हैं।
- क्रेडिट स्कोर (CIBIL): समय पर बिल भरने से आपका सिबिल स्कोर अच्छा होता है, जिससे भविष्य में होम लोन सस्ते में मिल सकता है।
उधार की जिंदगी जीने के बड़े नुकसान:
- ईएमआई (EMI) का बोझ: हम चीजें किस्तों में खरीद तो लेते हैं, लेकिन फिर हमारी आधी सैलरी सिर्फ किस्ते चुकाने में चली जाती है।
- भारी ब्याज (High Interest): अगर आप क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर नहीं भरते हैं, तो बैंक आपसे 36% से 40% तक का सालाना ब्याज वसूलते हैं।
- मानसिक तनाव: जब सिर पर हर समय कर्ज का बोझ रहता है, तो इंसान सुकून की नींद नहीं सो पाता। इसका सीधा असर आपकी सेहत और परिवार पर पड़ता है।
इस 'कर्ज के जाल' और 'महंगाई' से कैसे बचें?
हालात कितने भी खराब हों, थोड़ी सी समझदारी से हम अपने घर का बजट सुधार सकते हैं। आपको अपनी आदतों में कुछ कड़े बदलाव करने होंगे। सबसे पहले अपने खर्चों की एक लिस्ट बनाएं।
50-30-20 का नियम अपनाएं: अपनी सैलरी का 50% हिस्सा केवल जरूरी चीजों (किराया, राशन, बिजली) पर खर्च करें। 30% हिस्सा अपनी इच्छाओं (घूमना, बाहर खाना) के लिए रखें। और सबसे जरूरी, कम से कम 20% हिस्सा हर महीने बचाने की आदत डालें।
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ तभी करें जब आपके पास उसे चुकाने के लिए बैंक में नकद पैसा हो। फोन या कपड़े खरीदने के लिए ईएमआई बनवाना बंद करें। अगर आपकी एक आय (Income Source) से घर नहीं चल रहा है, तो कोई फ्रीलांस काम या पार्ट-टाइम काम ढूंढने की कोशिश करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह बात बिल्कुल सच है कि आज के दौर में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। 'आधार कार्ड' से ज्यादा 'उधार कार्ड' वाली बात एक गहरा तंज है हमारे सिस्टम और हमारी अर्थव्यवस्था पर। लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि उधार लेना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। यह सिर्फ एक दर्द निवारक (Painkiller) गोली की तरह है जो कुछ देर आराम देती है, लेकिन बीमारी को अंदर ही अंदर बढ़ाती रहती है। हमें अपनी आमदनी बढ़ाने और फिजूलखर्ची रोकने पर ही फोकस करना होगा।
क्या आपको भी लगता है कि महंगाई की वजह से घर चलाना मुश्किल हो गया है? क्या आपने भी कभी मजबूरी में लोन या क्रेडिट कार्ड का सहारा लिया है? अपने विचार और अनुभव हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। इस लेख को अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर करें ताकि वे भी इस वित्तीय जाल को समझ सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. कम सैलरी में पैसे बचाने का सबसे आसान तरीका क्या है?
Ans 1. सबसे आसान तरीका है कि सैलरी आते ही सबसे पहले अपनी बचत (कम से कम 10-20%) अलग निकाल लें। उसके बाद बचे हुए पैसों से अपना महीने का खर्च चलाएं। फालतू के सब्सक्रिप्शन और बाहर के खाने पर रोक लगाएं।
Q2. क्या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
Ans 2. नहीं, ऐसा करना जरूरी नहीं है। अगर आप अनुशासित हैं और हर महीने पूरा बिल समय पर चुकाते हैं, तो क्रेडिट कार्ड फायदेमंद है। लेकिन अगर आप मिनिमम ड्यू (Minimum Due) भरते हैं, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।
Q3. 'डेब्ट ट्रैप' (Debt Trap) या कर्ज का जाल क्या होता है?
Ans 3. जब आप अपना पुराना कर्ज चुकाने के लिए कोई नया कर्ज लेते हैं, तो उसे कर्ज का जाल कहते हैं। इसमें मूल रकम से ज्यादा आप सिर्फ ब्याज भरते रह जाते हैं और कभी बाहर नहीं निकल पाते।
Q4. अगर मेरे पास बहुत ज्यादा क्रेडिट कार्ड बिल हो गया है, तो क्या करूं?
Ans 4. सबसे पहले बैंक से बात करके अपने क्रेडिट कार्ड के बिल को एक आसान पर्सनल लोन में बदलवा लें। पर्सनल लोन का ब्याज क्रेडिट कार्ड के ब्याज से बहुत कम होता है। इसके बाद सभी कार्ड ब्लॉक कर दें जब तक सारा कर्ज खत्म न हो जाए।
Q5. क्या भारत में भविष्य में महंगाई कम होने की कोई उम्मीद है?
Ans 5. अर्थव्यवस्था के नियमों के अनुसार कीमतें कभी पुरानी स्थिति में वापस नहीं जाती हैं। महंगाई दर थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन चीजें सस्ती नहीं होंगी। इसलिए आपको महंगाई का रोना रोने के बजाय अपनी स्किल (Skills) बढ़ाकर अपनी इनकम बढ़ाने पर काम करना चाहिए।